ऐसे माहौल में
अपनी जिंदगी
घर की इज्जत
बैठ नाव में
चल गयी बाहर
नदी की तेज़ धार
में
नाव कभी भी
डूब सकती है
किसी काले पत्थर
से टकराके
उसके मन में
काले पत्थर की
बात नहीं
पर गर पर चक्कर
लगा रही काँपती इज्जत
काले पत्थर के
डर से
ये सोचकर कही
नाव डूब न जाये
विश्वास कुमार (प्रेम)
